आज के समय में, चाहे वो छोटे बच्चे हों, बजुर्ग हों या फिर नौजवान हों, दरअसल सभी को दांतों से जुडी कई तरह की समसयाओं का सामना करना पड़ता है। इस तरह ही, दांतों में सड़न और मसूड़ों में परेशानी किसी को भी हो सकती है। दरअसल, इस पर डॉक्टरों का कहना है, कि जो लोग अपने दांतों की अच्छे तरीके से देखभाल नहीं करते हैं, अपने दांतों की सफाई नहीं रखते हैं, कुछ भी खाने के बाद अपने मुँह को साफ़ नहीं रखते हैं और अक्सर वह खाने पीने की गलत आदतों को अपनाते हैं, जैसे कि काफी ज्यादा मीठे पदार्थों का सेवन करना, तो इस तरह के लोगों को दातों से जुड़ी गंभीर समस्या जैसे दांतों में सड़न और मसूड़ों की दिक्कतों का होना संभव है। ऐसा नहीं है कि ऐसी समस्याएं सिर्फ़ इन्हीं चीज़ों के कारण होती हैं, बल्कि कुछ बीमारियाँ और स्वास्थ्य स्थितियाँ भी दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी जैसी स्थितियों के लिए ज़िम्मेदार हो सकती हैं। हालंकि, आपको बता दें, कि दांतों से जुडी इन गंभीर समस्यायों से अपना बचाव किया जा सकता है। पर इस दौरान कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है, कि ऐसा कैसे हो सकता है? इसके लिए सबसे पहले यह जानकारी प्राप्त होना बहुत ही ज्यादा जरूरी है, कि दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी जैसी समस्या का खतरा किन लोगों को सबसे ज्यादा होता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी का खतरा किन लोगों को सबसे ज्यादा रहता है?
- छोटे बच्चे
दरअसल, दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा छोटे बच्चों को होता है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति छोटे बच्चों में उत्पन्न इस लिए होती है, क्योंकि वह समय-समय पर अपने दांतों की अच्छे तरीके से देखभाल नहीं करते हैं। ज्यादातर, छोटे बच्चों का ध्यान खेल कूद में ही होता है, इसलिए वे दिन में दो बार ब्रश करने को ज़्यादा महत्व नहीं देते, इसके साथ ही,वे अपने मुँह के स्वास्थ्य पर भी ध्यान नहीं देते है, तो इस तरह की स्थिति में न केवल दांतों में कीड़े लगते हैं, बल्कि मुँह से बदबू आने की समस्या भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा, आज के समय में छोटे और टीनएजर्स बच्चे ज्यादातर शुगर युक्त ड्रिंक का सेवन करते हैं, जो कि उनके स्वास्थ्य और दांतों की सेहत को खराब करने का एक मुख्य कारण होता है
- बुजुर्गों में
आम तोर पर, लोगों की बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर के बहुत सारे अंग ठीक तरीके से काम नहीं कर पाते हैं। यहां तक की ऐसे लोगों की इम्यूनिटी भी काफी ज्यादा कमजोर हो जाती है। एक उम्र के बाद सभी लोग बूढ़े हो जाते हैं और इस समय में, बुजुर्ग लोगों की हड्डियां काफी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं, जिससे कि वह अपने लचीलेपन को खो बैठते हैं और ज्यादा कुछ नहीं कर पाते हैं। जैसे कि इस उम्र में आकर लोग कमजोर हो जाते हैं, उसी तरह उनको दांतों से जुडी कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इन समस्यायों में न केवल, दांतों में कमजोरी होना, बल्कि मसूड़ों की कमजोरी और मसूड़ों से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। इस दौरान बुजुर्गों को दांतों में प्लाक जमना जैसी समस्या भी आसानी से हो जाती है। इसलिए, इस तरह की स्थिति में, अपने दांतों की नियमित रूप से देखभाल और दांतों के रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाएँ।
दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी के कारण
- बुरी आदतें, जैसे कि रोजाना शराब या फिर स्मोकिंग करना
- ज्यादातर लोगों को डायबिटीज जैसी समस्या का होना।
- ल्यूपस जैसी गंभीर बीमारी का होना।
निष्कर्ष
साफ़ और चमकदार दांत हमारी पर्सनैलिटी को निखारने में हमारी काफी ज्यादा मदद करते हैं, इसलिए इनकी देखभाल बहुत जरूरी होती है। जो लोग अपने दांतों की अच्छे से देखभाल नहीं करते हैं और कुछ भी खाने के बाद अपने मुँह को साफ़ नहीं रखते हैं, तो ऐसे लोगों को दातों से जुड़ी गंभीर समस्या जैसे दांतों में सड़न और मसूड़ों की दिक्कतों का होना संभव है। दांतों में सड़न और मसूड़ों में परेशानी किसी को भी हो सकती है, पर इस बीमारी का खतरा ज्यादातर बच्चों और बजुर्गों को काफी ज्यादा होता है। डायबिटीज जैसी समस्या का होना, रोजाना शराब या फिर स्मोकिंग करना और ल्यूपस जैसी गंभीर बीमारी होना दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी के मुख्य कारण हैं। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है या फिर आपको भी दांतों से जुड़ी किसी भी तरह कोई समस्या है और आप इस समस्या का इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही स्माइल ज़ोन डेंटल स्पेशलिटी सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।